सोमवार, 25 अप्रैल 2011

चरित्र भ्रष्ट का मुख्य कारण बनी आधुनिक शादियां




महाश्य दया किशन सैनी

रोहतक। बदलते वक्त में शादी-ब्याह भी चरित्र भ्रष्ट का एक मुख्य कारण साबित होने लगे हैं। अब पहले की भांति शर्मोहया का ख्याल किसी को नहीं रहा बल्कि युवक-युवतियां हाथ में हाथ डालकर डीजे की धुनों पर थिरकते हैं। उन्हें यह तक ख्याल नहीं रहता कि उनके बड़े-बुजुर्ग भी उनको देख रहे हैं। हालत यह है कि अभिभावक भी यह सब होता देखकर चुप हैं। इस भोंडेपन का सीधा सा असर भावी पीढ़ी पर भी पड़ रहा है। बेशक बच्चे कुछ नहीं बोलें मगर वे यह सब देखते व समझते हैं और बुरे संस्कार ग्रहण कर रहे हैं। इतना ही नहीं विवाह-शादियों में पटाखे छुड़ाए जाते हैं और बंदूक व पिस्तौल से हवा में गोलियां चलाकर भी प्रदुषण फैलाया जा रहा है। आधुनिकता के नाम पर अब तो बड़े-बड़े लोग शादियों में खाने-पीने के नाम पर शराब एवं मांस भी परोसने लगे हैं। हिंदुस्तानी संस्कृति का यह हाल होना बेहद चिंता का विषय है। क्यों शर्मोहया खत्म होती जा रही है और बच्चे एवं युवा गलत रास्ते पर चल पड़े हैं। हमें ठोस कदम उठाने होंगे ताकि भावी पीढ़ी का चरित्र निर्माण सही ढंग से हो सके।

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