सोमवार, 26 मार्च 2018

Saini Mali Samaj ki Dharmashalaye

माली समाज भवन 
नाथद्वारा
Udaipur , Rajasthan , India


माली सैनी धर्मषाला 
कमलेष्वर महादेव, इन्दरगढ़ बूंदी
Bundi , Rajasthan , India


सेठ भीखमदास परिहार माली सैनी छात्रावास 
रातानाड़ा, जोधपुर
Jodhpur , Rajasthan , India


जोधपुर भवन माली सैनी धर्मशाला 
हरिद्वार
Haridwar , Uttaranchal , India


माली सैनी धर्मशाला 
सुन्दर पर्वत, भीनमाल जिला जालोर
Jalor , Rajasthan , India


माली सैनी भवन 
गोकुलबाडी, श्विवगंज जिला सिरोही
Sirohi , Rajasthan , India


माली सैनी छात्रावास धर्मशाला 
स्वरूपगंज जिला सिरोही
Sirohi , Rajasthan , India


माली समाज भवन छात्रावास 
समदडी जिला बाडमेर
Barmer , Rajasthan


माली सैनी समाज भवन 
जैतारण पाली
Pali , Rajasthan , India



माली सैनी भवन 
बाड़मेंर
Barmer , Rajasthan , India


माली समाज भवन मंदिर 
पोकरण जिला जैसलमेर
Jaisalmer , Rajasthan , India


माली सैनी समाज भवन 
जैसलमेर
Jaisalmer , Rajasthan , India


माली धर्मशाला 
रामदेवरा, जैसलमेर
Jaisalmer , Rajasthan


माली सैनी धर्मशाला 
सांभरझील, जयपुर
Jaipur , Rajasthan , India


माली सैनी धर्मशाला 
फुलेरा, जयपुर
Jaipur , Rajasthan , India


माली सैनी छात्रावास 
पर्बतसर, नागौर
Nagaur , Rajasthan , India


माली सैनी भवन 
लाडनूं, नागौर
Nagaur , Rajasthan , India


माली सैनी धर्मशाला 
कोलायत, बीकानेर
Bikaner , Rajasthan , India


माली सैनी छात्रावास 
नवलगढ़, जिला झुंझुनु
Jhunjhunu , Rajasthan , India


माली सैनी छात्रावास 
फतहपुर, सीकर
Sikar, Rajasthan, India


माली सैनी छात्रावास 
ब्यावर, अजमेर
Ajmer, Rajasthan, India


माली सैनी धर्मषाला 
पीडावा, जिला झालावाड़
Jhalawar, Rajasthan, India


माली सैनी भवन 
भीलवाड़ा
Bhilwara , Rajasthan , India


माली सैनी भवन 
उदयपुर
Udaipur , Rajasthan , India


माली सैनी मंदिर व धर्मशाला 
मातृकुण्डिया, जिला चितौड़
Chittorgarh , Rajasthan , India


सैनी मंदिर और धर्मशाला 
कल्याण हॉस्पिटल के पीछे, सीकर
Sikar , Rajasthan , India


माली सैनी छात्रावास, 
जालोर
Jalor , Rajasthan , India


राजस्थान माली समाज भवन 
डॉक्टर अम्बेडकर रोड़, लक्ष्मण निवास, परेल, मुम्बई.12
Mumbai City , Maharashtra , India


माली सैनी छात्रावास 
माली जाति शिक्षा प्रचारक संघ, फालना
Pali , Rajasthan 


दिल्ली सैनी भवन धर्मशाला 
कालका माता मंदिर के पास, कालकाजी, नई दिल्ली
New Delhi , Delhi , India


सैनी धर्मशाला 
राजघाट, गाजियाबाद
Ghaziabad , Uttar Pradesh 


मालियों की नई बगीची 
आनन्दपुरी, जयपुर
Jaipur , Rajasthan


माली जाति नोहरा 
सुथारवाड़ा, उदयपुर
Udaipur , Rajasthan , India


कुशवाहा धर्मषाला एवं अतिथि निवास 
सी.33रू210/एस-5-6, हरिनगर, वाराणसी, उ.प्र.
Varanasi , Uttar Pradesh , India


कुशवाहा छात्रावास 
जलालाबाद, जिला शाहजहाँपुरा
Shahjahanpur , Uttar Pradesh , India


शाक्य धर्मशाला 
दिल्ली सब्जी मंडी, दिल्ली
New Delhi , Delhi , India


भारतीय आश्रम 
ठिठुर, कानपुर
Kanpur Nagar , Uttar Pradesh , India


सैनिक कुशवाहा धर्मशाला, 
ज्वालापुर, हरिद्वार
Haridwar , Uttaranchal , India


क्षत्रिय माली समाज धर्मशाला मंदिर 
रतलाम मध्यप्रदेश
Ratlam , Madya Pradesh , India


माली सैनी धर्मशाला, 
इन्दौर
Indore , Madya Pradesh , India


माली संस्थान छात्रावास 
रामबाग कागा, जोधपुर

Jodhpur , Rajasthan , India



सैनी भवन चण्डीगढ़ 
सेक्टर 24, चण्डीगढ़
Chandigarh , Chandigarh , India


माली समाज धर्मशाला 
लुणावा तहसील बाली, जिला पाली
Pali , Rajasthan , India


मालियों की बगीची 
घाटगेट, जयपुर
Jaipur , Rajasthan , India


माली जाति नोहरा 
टेकरी, उदयपुर
Udaipur , Rajasthan , India


क्षत्रिय बोर्डिंग 
नागपुर, महाराष्ट्र
Nagpur , Maharashtra , India


मौर्य शाक्य छात्रावास 
बदायूं, उत्तरप्रदेश
Badaun , Uttar Pradesh , India


गौतम बुद्व आश्रम 
कलान, शाहजहाँपुर
Shahjahanpur , Uttar Pradesh , India


शाक्य सेवा सदन 
शान्ति कॉलोनी, आई.टी.आई., इटावा, उत्तरप्रदेश
Etawah , Uttar Pradesh , India


महात्मा ज्योति बा फूले संस्थान 
विधाधर नगर, जयपुर
Jaipur , Rajasthan , India


राधाकृष्ण माली समाज धर्मशाला 
रतलाम
Ratlam , Madya Pradesh , India


महात्मा ज्योति बा फूले भवन 
ई-सात-एल 390, अरेरा कॉलोनी, भोपाल
Bhopal , Madya Pradesh , India


सौराष्ट रामी माली जाति धर्मशाला 
मानसरोवर, अम्बाजी
Banaskantha , Gujarat , India


रामी माली जाति 
वाडी, ईडर
Mehsana , Gujarat , India


रामी माली जाति वाडी 
मेहसाणा
Mehsana , Gujarat , India


रामी माली समाज शान्ति भवन 
मेहसाणा
Mehsana , Gujarat , India


सैनी धर्मशाला 
कलाप लोचनयमुना नगर, हरियाणा
Yamuna Nagar , Haryana , India


सैनी बोर्डिंग हाऊस 
रूड़की उत्तरप्रदेश
Kanpur Nagar , Uttar Pradesh , India


पंचायत क्षत्रिय फूल मालियन धर्मशाला 
सुन्दर विलास पुराना बस स्टेण्ड, अजमेर
Ajmer , Rajasthan , India


राजस्थानी सैनिक क्षत्रिय माली संघ भवन 
बैगम बाजार, हैदराबाद
Hyderabad , Andra Pradesh , India


न्यु राज्स्थानी सैनिक क्षत्रिय माली संघ भवन 
सूर्या नगर चितल, हैदराबाद
Hyderabad , Andra Pradesh , India


नर्मदेश्‍वर मंदिर एवं माली धर्मशाला 
पुष्कर, अजमेर
Ajmer , Rajasthan , India


माली समाज भवन गाँधीपुरा 
बालोतरा, जिला बाडमेर
Barmer , Rajasthan , India


माली जाति धर्मशाला एवं छात्रावास 
नया बस स्टेण्ड के पीछे, सिरोही
Sirohi , Rajasthan , India


माली समाज धर्मशाला 
उम्मेदाबाद, जिला जालोर
Jalor , Rajasthan , India


माली जाति धर्मशाला 
निम्बोरानाथ, फालना, जिला पाली
Pali , Rajasthan , India


पंवार धर्मशाला 
रेलवे स्टेडियम के पास, नागौर
Nagaur , Rajasthan , India


माली जाति धर्मशाला 
श्री सुमेर हायर सैकण्डरी स्कूल, महामन्दिर, जोधपुर
Jodhpur , Rajasthan , India


माली जाति धर्मशाला 
विष्णु मंदिर, मंडोर, जोधपुर
Jodhpur , Rajasthan


माली जाति धर्मशाला 
परशुराम महादेव, सादड़ी, जिला पाली
Pali , Rajasthan , India


माली समाज धर्मशाला 
सुमेर स्कू‍ल प्रांगण जोधपुर
Jodhpur , Rajasthan , India


पंचायत क्षत्रिय फूल मालियान धर्मशाला 
सुन्‍दर विलास, पुराना बस स्‍टेण्‍ड, अजमेर
Ajmer , Rajasthan , India


माली जाति धर्मशाला एवं छात्रावास 
नया बस स्‍टेण्‍ड के पीछे, सिरोही
Sirohi , Rajasthan , India


मालियों की धर्मशाला 
गोगागेट, गंगाशहर रोड, बीकानेर
Bikaner , Rajasthan , India



माली सैनी धर्मशाला 
सोनाणा खेतलाजी, सारणवाल
Mehsana , Gujarat 


माली सैनी धर्मशाला एवं छात्रावास 
मेडता शहर, जिला नागौर
Nagaur , Rajasthan 


सौराष्‍ट्र रामी माली जाति धर्मशाला 
मानसरोवर, अम्‍बाजी
Banaskantha , Gujarat , India


सैनी धर्मशाला 
कलाप लोचनयमुना नगर, हरियाणा
Yamuna Nagar , Haryana , India


नर्मदेश्वर मन्दिर एवं माली धर्मशाला 
पुष्केर अजमेर
Ajmer , Rajasthan , India


माली समाज धर्मशाला 
उम्मेदाबाद, जिला जालोर
Jalor , Rajasthan , India


माली जाति धर्मशाला 
निम्बोयरानाथ, फालना, जिला पाली
Pali , Rajasthan , India


माली जाति धर्मशाला 
परशुराम महादेव, सादडी जिला पाली
Pali , Rajasthan , India


माली जाति धर्मशाला 
विष्णु मन्दिर मण्डोडर, जोधपुर
Jodhpur , Rajasthan , India


माली जाति धर्मशाला 
श्री सुमेर हायर सैकण्डडरी स्कूल महामन्दिर जोधपुर
Jodhpur , Rajasthan , India


पंवार धर्मशाला 
रेल्वेर स्टे‍डियम के पास नागौर
Nagaur , Rajasthan , India


माली सैनी धर्मशाला 
कमलेश्व्र महादेव , इन्द्रछगढ बूदी
Bundi , Rajasthan , India


जोधपुर भवन माली सैनी धर्मशाला 
हरिद्वार
Haridwar , Uttaranchal , India


माली समाज धर्मशाला 
सुन्दर पर्वत, भीनमाल जिला जालोर
Jalor , Rajasthan , India


माली सैनी छात्रावास धर्मशाला 
स्वरूपगंज जिला सिरोही
Sirohi , Rajasthan , India


माली धर्मशाला 
रामदेवरा जैसलमेर`
Jaisalmer , Rajasthan , India


माली सैनी धर्मशाला 
सांभरझील , जयपुर
Jaipur , Rajasthan , India


माली सैनी धर्मशाला 
फुलेरा जयपुर
Jaipur , Rajasthan , India


माली सैनी धर्मशाला 
कोलायत बीकानेर
Bikaner , Rajasthan , India


माली सैनी धर्मशाला 
पीडावा जिला झालावाड
Jhalawar , Rajasthan , India


माली समाज मन्दिर एवं धर्मशाला 
मातृकुण्डिया जिला चित्तोलड
Chittorgarh , Rajasthan 


सैनी मन्दिर और धर्मशाला 
कल्याण हॉस्पिटल के पीछे सीकर
Sikar , Rajasthan , India


दिल्ली् सैनी भवन धर्मशाला 
कालका माता मन्दिर के पास, कालकाजी नई दिल्ली
New Delhi , Delhi , India


सैनी धर्मशाला 
रामघाट गाजियाबाद
Ghaziabad , Uttar Pradesh , India


कुशवाहा धर्मशाला एवं अतिथि निवास 
सी-33/210/एस-5-6 हरिनगर वाराणासी , उत्तर प्रदेश
Varanasi , Uttar Pradesh , India


शाक्य धर्मशाला 
दिल्ली सब्जी– मण्‍डी नई दिल्ली
New Delhi , Delhi , India


माली समाज का इतिहास

        माली ” शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के शब्द माला से हुई है , एक पौराणिक कथा के अनुसार माली कि उत्पत्ति भगवान शिव के कान में जमा धुल (कान के मेल ) से हुई थी ,वहीँ एक अन्य कथा के अनुसार एक दिन जब पार्वती जी अपने उद्यान में फूल तोड़ रही थी कि उनके हाथ में एक कांटा चुभने से खून निकल आया , उसी खून से माली कि उत्पत्ति हुई और वहीँ से माली समाज अपने पेशे बागवानी से जुडा |
       माली समाज में एक वर्ग राजपूतों कि उपश्रेणियों का है| विक्रम सम्वत १२४९ (११९२ इ ) में जब भारत के अंतिम हिंदू सम्राट पृथ्वी राज चौहान के पतन के बाद जब शहाबुद्दीन गौरी और मोहम्मद गौरी शक्तिशाली हो गए और उन्होंने दिल्ली एवं अजमेर पर अपना कब्ज़ा कर लिया तथा अधिकाश राजपूत प्रमुख या तो साम्राज्य की लड़ाई में मारे गए या मुग़ल शासकों द्वारा बंदी बना लिए गए , उन्ही बाकि बचे राजपूतों में कुछ ने मुस्लिम धर्म स्वीकार कर लिया और कुछ राजपूतों ने बागवानी और खेती का पेशा अपनाकर अपने आप को मुगलों से बचाए रखा , और वे राजपूत आगे चलकर माली कहलाये !
       माली समाज का इतिहास किसी भी जाती, वंश एव कुल परम्परा के विषय मे जानकारी के लिये पूर्व इतिहास एव पूर्वजो का ज्ञान होना अति आवश्यक है| इसलिए सैनी जाती के गोरव्पूर्ण पुरुषो के विषय मे जानकारी हेतु महाभारत काल के पूर्व इतिहास पर द्रष्टि डालना अति आवश्यक है| 
       आज से ५१०६ वर्ष पूर्व द्वापरकाल के अन्तिम चरण मे य्द्र्वंश मे सचिदानंद घन स्वय परमात्मा भगवान् श्रीकृषण क्षत्रिय कुल मे पैदा हुए और युग पुरुष कहलाये| महाभारत कई युध्दोप्रांत यदुवंश समाप्त प्राय हो गया था| परन्तु इसी कुल मई महाराज सैनी जिन्हे शुरसैनी पुकारते है| जो रजा व्रशनी के पुत्र दैव्मैघ के पुत्र तथा वासुदेव के पिता भगवन श्रीकिशन के दादा थे| इन्ही महाराज व्रशनी के छोटे पुत्र अनामित्र के महाराज सिनी हुये, इस प्रकार महाराज शुरसैनी तथा सिनी दोनों काका ताऊ भाई थे| इन्ही दोनों महापुरुषों के वंशज हम लोग सैनी क्षत्रिय कहलाये|
        कालांतर मई वृशनी कुल का उच्चारण सी वृ अक्षर का लोप हो गया और षैणी शब्द उच्चारित होने लगा जो आज भी उतरी भारत के पंजाब एव हरियाणा प्रांतो मे सैनी शब्द के एवज मे अनपढ़ जातीय बंधू षैणी शब्द ही बोलते है, और इसी सिनी महाराज के वंश परम्परा के अपने जातीय बह्धू सिनी शब्द के स्थान पर सैनी शब्द का उच्चारण करने लगे है| जो सर्वथा उचित और उत्तम है| कालांतर मे वृशनि गणराज्य संगठित नहीं रहा और भिन्न भिन्न कबीलों मे विभाजित होकर बिखर गया| किसी भी भू भाग पर इसका एकछत्र राज्य नहीं रहा किन्तु इतिहास इस बात का साक्षी है| की सैनी समाज के पूर्वज क्षत्रिय वंश एव कुल परम्परा मे अग्रणी रहे है|
        महाभारत काल के बाद सैनी कुल के अन्तिम चक्रवर्ती सम्राट वीर विक्रेमादित्य हुए है जिन्हे नाम पर आज भी विक्रम सम्वत प्रचलित है| इससे यह स्पष्ट है की सैनी जाती का इतिहास कितना गोरवपूर्ण रहा है| यह जानकर सुखद अनुभूति होती है की हमारे पूर्वज कितने वैभवशाली वीर अजातशत्रु थे| भारत राष्ट्र संगठित न रहने पर परकीय विदेशी शासको की कुद्रष्टि का शिकार हुआ तथा कुछ शक्तिशाली कबीलों ने भारत को लुटने हेतु कई प्रकार के आक्रमण शुरू कर दिये, यूनान देश के शासक सिकंदर ने प्रथम आक्रमण किया किन्तु पराजित होकर अपने देश यूनान वापस लोट गया|
         इसके बाद अरब देशो के कबीलों ने भारत पर आक्रमण कर लूटपाट शुरू कर दी और भारत पर मुस्लिम राज्य स्थापित कर कई वर्षो तक शासन किया| इसके बाद यूरोप देश के अग्रेज बडे चालाक चतुर छलकपट से भारत पर काबिज हो गये| अन्ग्रजो ने भारत के पुराने इतिहास का अध्यन करने यहा के पूर्व शासको एव जातियों के इतिहास की जानकारी हेतु कई इतिहासकारों को भारत की भिन्न प्रांतो मे इतिहास संकलन हेतु नियुक्त किया | 
        एक प्रसिध्द अंग्रेज इतिहासकार ‘परजिटर’ ने भारत की पोरानिक ग्रंथो के आधार पर अपने वृशनी वंश का वृक्ष बिज तैयार किया जिसका भारत के प्रसिध्द इतिहासकार डा.’ए.डी.पुत्स्लकर ‘ एम.ए.,पी एच डी ने भी इस मत का प्रतिपादन किया है| वृशनी (सैनी) जाती के महाराज वृशनी के बाबत अग्रेजी मे लिखा ” Vrishanis youngest son Anamitra have a son and their desiendents were called ” Saiyas “(See Anicient Indian Hostorical Traditio 1922 page 104-105-105)” महाराज वृश्निजी के चोटी पुत्र अनामित्र के महाराज सीनी हुये इसी सिन्नी शब्द का पर्यायवाची शब्द ‘सैनी’ हुआ जिनकी वंशज कहलाते है| (देखे भारत के प्राचीन इतिहास के संकलन मे सं १९२२ मे पेज नं. १०४ सी १०६ तक )|
         इस प्रकार भारत के प्राचीन ग्रंथ इतिहास पुरान तथा महाभारत के अनुशासन पर्व मे भी महाराज सैनी के सम्बन्ध मे उल्लेख मिलता है| १. वायु पुराण अध्याय ३७ शुरसैनी महाराजर्थी एक गुनोतम तथा श्लोक १२९ जितेन्द्रिय सत्यवादी प्रजा पालक तत्पर : २. महाभारत अनुशासन पर्व अध्याय १४९ ‘सदगति स्तक्रती संता सदगति सत्य न्याय परायण’ तथा श्लोक ८८ मे शुर सैनी युद्ध स्न्निवास सुयामन: महाराज शुरसैनी चन्द्रवंशी सम्राट थे इनका राज्य प्राचीनकाल की हस्तिनापुर (वर्मन दिल्ली क्षेत्र पंजाब तथा मथुरा वृदावन उतर प्रदेश) मे फैला हुआ था| इसका वर्णन चाणक्य श्रिषी ने चन्द्रगुप्त मोर्य के शासनकाल मे २५० वर्ष पूर्व था उसका वर्णन कोटील्य अर्थशास्त्र मे किया है की यदुवंश (षैनी) राज्य एव सूर्यवंशी गणराज्य बिखर चुकाई थे| इन राजपरिवारो के कुछ शासको ने बोद्ध धर्म ग्रहण कर लिया कुछ एक ने जीविकोपार्जन के लिय कृषि को अपना लिया|
          यूनान के सिकंदर के साथ जो यूनानी इतिहासकार भारत मे आये थे| उन्होने इतिहास संकलन करते समय यदुवंशी तथा सैनी राजाओ मे उच्च कोटी की वीरता और क्षोर्य के साथ साथ उन्हे अच्छ कृषक भी बताया तथा कोटीलय के अर्थक्षास्त्र मे उल्लेख मिला है की क्षत्रियो मे वैक्ष्य वृति (व्यापर ) करने वाले बुद्धिजीवी भी थे| रामायण काल के रजा जनक कहती है की हल चलते samay सीता मिली इस कथा का भाव कुछ भी हो यह घटना इस तथ्य को प्रतिपादित करती है की रामायण काल के रजा भी खैतिबादो करती थे| प्रसिद्ध साहित्यकार कक्शिप्रसाद जायसवाल तथा अंग्रेज इतिहासकार कर्नल ताड़ जिसने राजस्थान की जातियों का इतिहास लिखा है ने क्षुर्सैनी वंश को कई एक ग्न्राज्यो मे बटा हुआ माना है| इन इतिहासकारों के अलावा चिन देश के इतिहासकार ‘मैग्स्थ्निज’ ने काफी वर्षो तक भारत मे रहकर यह कई जातियों कई भ्लिभाती जाच कर सैनी गणराज्यों के बाबत इतिहास मे उल्लेख किया है| इन आर्य शासको का राज्य अर्याव्रता तथा यूरोप के एनी नगरों तक था| महाभारत कई मासा प्रष्ठ १४९-१५० और वत्स पुराण अध्याय ४३ शलोक ४५ से यह पता चलता है कई शुरसैनी प्रदेश मे रहने वाले शुरसैनी लोग मालवे (मध्य प्रदेश) मे जाकर मालव अर्थात माली नाम से पहचाने जाने लगे| कालान्तर मे इन्ही मालवो मे चक्रवर्ती सम्राट वीर विक्रमादित्य हुये जिनके नाम से विक्रम सम्वत चालू हुआ| यह सम्वत छटी शताब्दी से पहले माली सम्वत के नाम से प्रसिद्ध था| मालव का अपन्भ्रस मालव हुआ जो बाद मे माली हो गया| ऐसा मत कई इतिहासकार मानते है|
       संकलन करते समय यदुवंशी तथा सैनी राजाओ मे उच्च कोटी की वीरता और क्षोर्य के साथ साथ उन्हे अच्छ कृषक भी बताया तथा कोटीलय के अर्थक्षास्त्र मे उल्लेख मिला है की क्षत्रियो मे वैक्ष्य वृति (व्यापर ) करने वाले बुद्धिजीवी भी थे| रामायण काल के रजा जनक कहती है की हल चलते samay सीता मिली इस कथा का भाव कुछ भी हो यह घटना इस तथ्य को प्रतिपादित करती है की रामायण काल के रजा भी खैतिबादो करती थे| प्रसिद्ध साहित्यकार कक्शिप्रसाद जायसवाल तथा अंग्रेज इतिहासकार कर्नल ताड़ जिसने राजस्थान की जातियों का इतिहास लिखा है ने क्षुर्सैनी वंश को कई एक ग्न्राज्यो मे बटा हुआ माना है| इन इतिहासकारों के अलावा चिन देश के इतिहासकार ‘मैग्स्थ्निज’ ने काफी वर्षो तक भारत मे रहकर यह कई जातियों कई भ्लिभाती जाच कर सैनी गणराज्यों के बाबत इतिहास मे उल्लेख किया है| इन आर्य शासको का राज्य अर्याव्रता तथा यूरोप के एनी नगरों तक था|
महाभारत कई मासा प्रष्ठ १४९-१५० और वत्स पुराण अध्याय ४३ शलोक ४५ से यह पता चलता है कई शुरसैनी प्रदेश मे रहने वाले शुरसैनी लोग मालवे (मध्य प्रदेश) मे जाकर मालव अर्थात माली नाम से पहचाने जाने लगे| कालान्तर मे इन्ही मालवो मे चक्रवर्ती सम्राट वीर विक्रमादित्य हुये जिनके नाम से विक्रम सम्वत चालू हुआ| यह सम्वत छटी शताब्दी से पहले माली सम्वत के नाम से प्रसिद्ध था| मालव का अपन्भ्रस मालव हुआ जो बाद मे माली हो गया| ऐसा मत कई इतिहासकार मानते है| अब भी पैक्षावर मे खटकु सैनी पायी जाते है| तथा स्यालकोट सन १९४७ से डोगर सैनियो से भरा हुआ पड़ा था, सैनी शब्द के विवेचन से सैनी समाज के अपने लोगो को भली भाती ज्ञान चाहिये कई हमारा सैनी समाज सम्वत १२५७ के पर्व महाराज पृथ्वीराज चोहान भारत मे कितने वैभवशाली एव गोरवपूर्ण थे, अरब देश के लुटेरे मोहम्मद गोरी जो सम्राट पृथ्वीराज के भाई जयचंद को प्रलोभन देकर पृथ्वीराज को खत्म कराकर दिल्ली का शासक बन बैठा| इसकी पक्ष्चात भारत पर लगातार मुस्लिम आक्रताओ ने हमले कर बहरत के तत्कालीन शासको को गुलाम बना लिया| इसी समय से क्षत्रिय वीर भारत के किसी भी प्रान्त मे संगठित नही रहे|
       क्षत्रिय वीर अलग अलग रियासतो मे मुगलों से विधर्मियों से मिलकर अपनी बहिन बिटिया मुगलों को देने लगा गये| इससे राजस्थान के राजघराने के राजा अग्रणी रहे सिवाय मेवाड़ के म्हाराजाओ के| अन्य क्षत्रिय सरदार जो रियासतो के शासक नही थे किन्तु वीर और चरित्र से आनबान के धनी थे| उन्होने अपनी बहिन बैटिया की अस्मत बचाने के लिय क्षत्रिय वंश ( कुल छोड़कर ) इन क्षत्रियो से अलग हो गये| यह क्षत्रिय राजा राजस्थान मे अपना वर्चस्व कायम रखने हेतु अपने ही भाइयो को जिन्होंने ख्स्त्रिय कुल से अलग होकर दिल्ली के तत्कालीन बादशाह शहबुदीन मोहम्मद गोरी के पास अपने मुखियाओ को बेचकर कहला भेजा की अब हम क्षत्रियो से अलग हो गये| हमने अपना कार्यक्षेत्र कृषि अपना लिया| बादशाह को चाहिये ही क्या था? उसने सोचा कई बहुत ही अच्छा हुआ क्षत्रिय समाज अब संगठित नहीं रहा, क्षत्रियो कई शक्ति छिन्न भिन्न हो गये| अब आराम से दिल्ली का बादशाह बना रहूगा | विक्रम सम्वत १२५७ अथार्त आज से ८०० वर्ष क्षत्रिय समाज राजपूतो से अलग हुये और कृषि कार्य अपना कर माली बने| सैनी क्षत्रिय जो माली शब्द से पहचाने जाने लगे      

Saini Sahab ने 8 नई फ़ोटो जोड़ीं — Monu Saini के साथ.
Monu Saini from farrukhnagar Gurgaon haryana
Open Mr India 2018 Himachal distt una (h p) second prize
Monu Saini गुड़गांव हरियाणा से Monu Saini
श्री इंडिया 2018 हिमाचल जिला ऊना (एच पी) द्वितीय पुरस्कार खोलें

Sanjay Saini from jind haryana
23 and 24 march got silver medal in Mr. India 2018 at pune, maharashtra ibbff. Finally I achieved my first goal Mr. India ibbff. Congrats saini sahab
जींद हरियाणा से संजय सैनी
23 और 24 मार्च को पुणे, महाराष्ट्र ibf में श्री इंडिया 2018 में रजत पदक मिला । अंत में मैंने अपना पहला लक्ष्य श्री इंडिया ibf हासिल किया । बधाई हो सैनी साहब


Saini Sahab ने 4 नई फ़ोटो जोड़ीं.
#Geetsaini get the 3rd place in pune national championship.
Congratulations
#geetsaini पुणे राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में तीसरा स्थान प्राप्त करें ।
बधाई हो